चेरो जनजाति में जजमानी व्यवस्था
|
समुदाय का
नाम |
कार्य |
|
धोबी |
शुद्धिकरण |
|
लोहार |
दैनिक जीवन
में उपयोग होने वाले लोहे के औजार को बनाना |
|
बैगा/बईगिन |
शादी-विवाह एवं पूजा-पाठ में कुल देवी की पूजा |
|
गुरुबाबा(पुरोहित) |
गुरमुख
करवाना(संतान के विवाह को विवाह करने की योग्यता प्राप्त करना ) |
|
ठाकुर(नाई) |
शादी, छठी,
मृत्यु इत्यादि में प्रमुख पंडित के सहायक |
|
डोम(मेहतर) |
मृत्यु के
उपरांत शव को जलाने में सहयोगी |
|
महार/महराइन |
शादी एवं
मृत्यु में ढोल बजाना, महराईन के द्वारा प्रसव करवाना |
|
पंडित |
शादी, मृत्यु
एवं अन्य कार्यक्रमों में कर्मकांड करवाना
|
|
कटाह |
मृत्यु के
उपरांत कर्मकांड करवाना |
|
कहार |
शादी मे
दुल्हन के डोली उठाना |
धोबी:- चेरो समुदाय मे किसी बच्चे के छठी होने या किसी की मृत्यु होने
उपरांत घर की शुद्धिकरण के लिए धोबी के द्वारा मुहल्ले के सभी घरों से एक-एक कपड़ा
लेकर धोया जाता है। फिर धोए हुए कपड़े को वापस कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को शुद्धिकरण कहते हैं। बदले में धोबी चेरो
परिवार के घर से साल भर में ‘खरवन’ ले जाता है। एवं खरवन के रूप में उसे मौसमी
अनाज दिया जाता है जिसे ‘सिदधा’ कहा जात है।
लोहार:- चेरो पने जीवन कल में अपने दैनिक जीवन में बहुत सारे
औजार का उपयोग करता है जिसमें शामिल हैं- हसुआ, टाँगी, फार, साबल, कोडी, गईता,
रुखना, बैशला, कोड़नी इत्यादि (चेरो समुदाय के द्वारा स्थानीय भाषा में औजार के
नाम)। लोहार के द्वारा उपरोक्त औजारों का तेज किया जाता है तथा सिलवट और लोढ़ा को भी
कुटता है साथ ही नया औजार भी बनाता है। बदलें में लोहार को चेरो के प्रत्येक
परिवार से मौसमी फसल साल भर में खरवन के तौर पर दिया जाता है।
![]() |
| कुल देवता को मऊर अर्पण करते हुए बईगिन Photo(1):-Laxman Singh from Sua, Medininagar,Palamu |
![]() |
| विवाह से पूर्व मंडप मे सामग्री को ठीक करते ठाकुर Photo(2):-Laxman Singh from Sua, Medininagar,Palamu |
डोम (मेहतर):- डोम या मेहतर चेरो के साथ सामाजिक रूप से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है की इनके बिना शव का जलाना शुभ नहीं होता है। अतः डोम शव के जलाने के लिए आग प्रज्वलित करता है। फिर वो जलती हुई लकड़ी को मुखाग्नि देने वालों को प्रदान करता है। बदले में उसे कुछ मुद्रा दी जाती है
पंडित:- चेरो समुदाय में कर्मकांड
को बढ़ावा देने का काम पंडित के द्वारा ही किया गया है। पंडित चेरो समाज में होने वाले
सभी प्रकार के हिन्दू-कर्मकांड से जुड़े क्रियाओं को करवट है। बदले में इसे भी खरवन
के साथ कुछ मुद्रा दिया जाता है।
![]() |
| मटकोड़वा के लिए जाते हुए लोग Photo(3):-Laxman Singh from Sua, Medininagar,Palamu |
कहार:- जिस वक्त चेरो समुदाय में डोला शादी-विवाह हुआ करता था उस वक्त डोली को टाँगने के लिए कहार को बुलाया जाता था। बदले में उनको मेहनताना दी जाती है ।
कटाह:- यह ब्राह्मण जाति से ही आता है। परंतु कटाह सिर्फ मृत्यु कार्य में ही आते हैं और मृत आत्मा के स्वर्ग के नाम पर बहुत सारे पैसे और सामग्री को कटाह को दी जाती है। चेरो मे ऐसा माना जाता है की सुख के सामग्री दान करने से मृत आत्मा को स्वर्ग प्राप्त होगा।
नोट:- यह पूर्णतः रिसर्च आधारित लेख है। विशेष जानकारी के लिए आप लेखक से संपर्क कर सकते हैं। हमसे सम्पर्क करें-sksinghsua@gmail.com



यदि आप चेरो जनजाति से जुड़े किसी भी प्रकार के जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो हमें ईमेल करें:-sksinghsua@gmail.com
जवाब देंहटाएं