| पंचायत सुआ, मेदिनीनगर का एक दृश्य |
The Chero
यह ब्लॉग पूर्णतः रिसर्च आधारित है। इसमें कुछ अतिशयोक्ति नहीं है।
शनिवार, 16 दिसंबर 2023
चेरो जनजाति का पंचायती व्यवस्था -'भैयारी (बरियारी) पंचायत'
शनिवार, 22 मई 2021
चेरो जनजाति की जजमानी व्यवस्था
चेरो जनजाति में जजमानी व्यवस्था
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समुदाय का
नाम |
कार्य |
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धोबी |
शुद्धिकरण |
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लोहार |
दैनिक जीवन
में उपयोग होने वाले लोहे के औजार को बनाना |
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बैगा/बईगिन |
शादी-विवाह एवं पूजा-पाठ में कुल देवी की पूजा |
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गुरुबाबा(पुरोहित) |
गुरमुख
करवाना(संतान के विवाह को विवाह करने की योग्यता प्राप्त करना ) |
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ठाकुर(नाई) |
शादी, छठी,
मृत्यु इत्यादि में प्रमुख पंडित के सहायक |
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डोम(मेहतर) |
मृत्यु के
उपरांत शव को जलाने में सहयोगी |
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महार/महराइन |
शादी एवं
मृत्यु में ढोल बजाना, महराईन के द्वारा प्रसव करवाना |
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पंडित |
शादी, मृत्यु
एवं अन्य कार्यक्रमों में कर्मकांड करवाना
|
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कटाह |
मृत्यु के
उपरांत कर्मकांड करवाना |
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कहार |
शादी मे
दुल्हन के डोली उठाना |
धोबी:- चेरो समुदाय मे किसी बच्चे के छठी होने या किसी की मृत्यु होने
उपरांत घर की शुद्धिकरण के लिए धोबी के द्वारा मुहल्ले के सभी घरों से एक-एक कपड़ा
लेकर धोया जाता है। फिर धोए हुए कपड़े को वापस कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को शुद्धिकरण कहते हैं। बदले में धोबी चेरो
परिवार के घर से साल भर में ‘खरवन’ ले जाता है। एवं खरवन के रूप में उसे मौसमी
अनाज दिया जाता है जिसे ‘सिदधा’ कहा जात है।
लोहार:- चेरो पने जीवन कल में अपने दैनिक जीवन में बहुत सारे
औजार का उपयोग करता है जिसमें शामिल हैं- हसुआ, टाँगी, फार, साबल, कोडी, गईता,
रुखना, बैशला, कोड़नी इत्यादि (चेरो समुदाय के द्वारा स्थानीय भाषा में औजार के
नाम)। लोहार के द्वारा उपरोक्त औजारों का तेज किया जाता है तथा सिलवट और लोढ़ा को भी
कुटता है साथ ही नया औजार भी बनाता है। बदलें में लोहार को चेरो के प्रत्येक
परिवार से मौसमी फसल साल भर में खरवन के तौर पर दिया जाता है।
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| कुल देवता को मऊर अर्पण करते हुए बईगिन Photo(1):-Laxman Singh from Sua, Medininagar,Palamu |
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| विवाह से पूर्व मंडप मे सामग्री को ठीक करते ठाकुर Photo(2):-Laxman Singh from Sua, Medininagar,Palamu |
डोम (मेहतर):- डोम या मेहतर चेरो के साथ सामाजिक रूप से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है की इनके बिना शव का जलाना शुभ नहीं होता है। अतः डोम शव के जलाने के लिए आग प्रज्वलित करता है। फिर वो जलती हुई लकड़ी को मुखाग्नि देने वालों को प्रदान करता है। बदले में उसे कुछ मुद्रा दी जाती है
पंडित:- चेरो समुदाय में कर्मकांड
को बढ़ावा देने का काम पंडित के द्वारा ही किया गया है। पंडित चेरो समाज में होने वाले
सभी प्रकार के हिन्दू-कर्मकांड से जुड़े क्रियाओं को करवट है। बदले में इसे भी खरवन
के साथ कुछ मुद्रा दिया जाता है।
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| मटकोड़वा के लिए जाते हुए लोग Photo(3):-Laxman Singh from Sua, Medininagar,Palamu |
कहार:- जिस वक्त चेरो समुदाय में डोला शादी-विवाह हुआ करता था उस वक्त डोली को टाँगने के लिए कहार को बुलाया जाता था। बदले में उनको मेहनताना दी जाती है ।
कटाह:- यह ब्राह्मण जाति से ही आता है। परंतु कटाह सिर्फ मृत्यु कार्य में ही आते हैं और मृत आत्मा के स्वर्ग के नाम पर बहुत सारे पैसे और सामग्री को कटाह को दी जाती है। चेरो मे ऐसा माना जाता है की सुख के सामग्री दान करने से मृत आत्मा को स्वर्ग प्राप्त होगा।
नोट:- यह पूर्णतः रिसर्च आधारित लेख है। विशेष जानकारी के लिए आप लेखक से संपर्क कर सकते हैं। हमसे सम्पर्क करें-sksinghsua@gmail.com
गुरुवार, 13 मई 2021
गुरुवार, 15 अप्रैल 2021
चेरो जनजाति का बदलता दौर
चेरो जनजाति का बदलता दौर
झारखंड के पलामू प्रमंडल में वास करने वाले चेरो जनजाति का भूतकाल ऐतिहासिक है। एक समय था जब चेरो झारखंड के प्रतापी राजवंशों में गिनती हुआ करते थे जिसका साक्ष्य है -लातेहार में अवस्थित पलामू का किला, मेदिनीनगर के समीप शाहपुर में 'शाहपुर का किला', 'लातेहार के मानकेरी किला', मनातू के 'नवागढ़ का किला' एवं एवं अन्य छोटे-छोटे किलें। चेरो जनजाति बदलते वक्त के साथ अपनी रणनीति भी बदलते रहा जिसके परिणाम स्वरूप ही वह पलामू क्षेत्र में साम्राज्य को कायम करते रहने में सक्षम रहे। अन्य जातियों के अनुरूप इन्होने भी ‘जैसा देश वैसा वेश’ को अपनाया। इसीलिए इतिहास में देखा गया कि जब भी चेरो राजा कमजोर होते नजर आए पीछे हटकर रणनीति बनाई और जैसे ही मौका मिला वैसे ही सेना को संगठित करके पुनः चढ़ाई की और अपनी छीनी हुई राज्य वापस हासिल किया।
अभी वर्तमान समय में चेरो जनजाति के लोगों से बात करने से पता चल जाता है कि इन्हें अपने इतिहास पर गर्व है और वे इस इतिहास को लेकर याद कर जीना चाहते हैं। किन्तु बदलते दौर में चेरो जनजाति थोड़े पीछे रह गए हैं जिसमें देखा जा सकता है की इनकी प्राचीन किला लगभग खंडर में बदलते जा रहे हैं। इनका आजीविका का मात्र साधन बरसाती खेती एवं मजदूरी ही हैं।
चेरो परिवारों
में उच्च-स्तरीय शिक्षा की कमी है। जो परिवार आर्थिक रूप से थोड़े मजबूत हैं वे ही उच्च
शिक्षा को प्राप्त कर पाते हैं, अन्यथा आम लोग ऐकडेमिक पढ़ाई भी पूरा नहीं कर पाते हैं।
चेरो के रहन सहन एवं संस्कृति जनजाति एवं हिन्दुओ का मिश्रण है। चेरो सरहुल भी मानते
हैं और रामनवमी भी किन्तु हिन्दू धर्म से इनको मोह भंग होता दिख रहा है और ये अब आदिवासी/
सरना धर्म को मानने लगे हैं।
चेरो जनजाति के पंचायती व्यवस्था भी है जो पूर्णतः लोकतात्रिक है, इनके पंचायती व्यवस्था को 'भैयारी पंचायती व्यवस्था' कहते है। अन्य जनजाति के भांति इनमें भी, अचल सम्पतियों पर पुरुष पक्ष का अधिकार होता है किन्तु पुरुष के नहीं होने पर महिलायें/बेटियाँ ही जगह जमीन के असली मालिक रहती है।
चेरो एक इंडो-आर्यन भाषा 'सादरी' बोलते हैं जिसमें समय के साथ अंग्रेजी के शब्दों की बहुलता होती है। इससे साफ पता चलती है कि चेरो अंग्रेजों के भाषा को भी समझने का भरपूर प्रयास किया ताकि उनके खिलाफ रणनीति बनाया जा सके।
नोट: चेरो के बारे में विस्तार से टॉपिक के अनुसार इसी ब्लॉग के माध्यम से मिलता रहेगा,,,
अतः आप समय-समय पर ब्लॉग को देखते रहें, बहुत जल्द ही अगला टॉपिक आपको पढ़ने को मिलेगा।
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बुधवार, 14 अप्रैल 2021
Written by: Me(Surendra)
"Ab to gharhi ne kuchh karela padtai…( Now we have to search a livelihood option at home itself…)" – Voices of Chuchrumanr village
Sr.
no
|
Name of the
occupation
|
No. Of household involved
|
Average annual
income (Rs.)
|
1
|
Agriculture
|
110
|
12264
|
2
|
Farm-based labour
|
15
|
20000
|
3
|
Seasonal migration
|
60
|
31850
|
4
|
Daily based labour
|
35
|
70000
|
5
|
Goat rearing
|
69
|
2609
|
6
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Non-timber Forest Produce
|
40
|
24000
|
शनिवार, 11 अप्रैल 2020
The Duplicate Development ( DD) by Surendra Kumar Singh
The Duplicate Development
चेरो जनजाति का पंचायती व्यवस्था -'भैयारी (बरियारी) पंचायत'
खंड-२ परिचय अन्य जनजातियों के भांति चेरो जनजाति में भी स्वशासन व्यवस्था होती है जिसे भैयारी पंचायत कहते हैं । परंतु चेरों की पंचायती व्य...
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चेरो जनजाति में जजमानी व्यवस्था चेरो जनजाति में निम्न समुदाय जजमानी व्यवस्था के साथ जुड़े हुए हैं - ...
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A report cum case story on the situation of the stranded migrant worker during Covid-19, Locked-down ...











