शनिवार, 22 मई 2021

चेरो जनजाति की जजमानी व्यवस्था

   

चेरो जनजाति में जजमानी व्यवस्था

            चेरो जनजाति में निम्न समुदाय जजमानी व्यवस्था के साथ जुड़े हुए हैं -
            
                 

समुदाय का नाम

कार्य

धोबी

शुद्धिकरण

लोहार

दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले लोहे के औजार को बनाना        

बैगा/बईगिन

शादी-विवाह एवं पूजा-पाठ में कुल देवी की पूजा

गुरुबाबा(पुरोहित)

गुरमुख करवाना(संतान के विवाह को विवाह करने की योग्यता प्राप्त करना )

ठाकुर(नाई)

शादी, छठी, मृत्यु इत्यादि में प्रमुख पंडित के सहायक  

डोम(मेहतर)

मृत्यु के उपरांत शव को जलाने में सहयोगी

महार/महराइन

शादी एवं मृत्यु में ढोल बजाना, महराईन के द्वारा प्रसव करवाना

पंडित

शादी, मृत्यु एवं अन्य कार्यक्रमों में कर्मकांड करवाना 

कटाह

मृत्यु के उपरांत कर्मकांड करवाना

कहार

शादी मे दुल्हन के डोली उठाना


    उपरोक्त समुदाय का संक्षेप में विवरण- 

धोबी:- चेरो समुदाय मे किसी बच्चे के छठी होने या किसी की मृत्यु होने उपरांत घर की शुद्धिकरण के लिए धोबी के द्वारा मुहल्ले के सभी घरों से एक-एक कपड़ा लेकर धोया जाता है। फिर धोए हुए कपड़े को वापस कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को शुद्धिकरण कहते हैं। बदले में धोबी चेरो परिवार के घर से साल भर में ‘खरवन’ ले जाता है। एवं खरवन के रूप में उसे मौसमी अनाज दिया जाता है जिसे ‘सिदधा’ कहा जात है।

लोहार:- चेरो पने जीवन कल में अपने दैनिक जीवन में बहुत सारे औजार का उपयोग करता है जिसमें शामिल हैं- हसुआ, टाँगी, फार, साबल, कोडी, गईता, रुखना, बैशला, कोड़नी इत्यादि (चेरो समुदाय के द्वारा स्थानीय भाषा में औजार के नाम)। लोहार के द्वारा उपरोक्त औजारों का तेज किया जाता है तथा सिलवट और लोढ़ा को भी कुटता है साथ ही नया औजार भी बनाता है। बदलें में लोहार को चेरो के प्रत्येक परिवार से मौसमी फसल साल भर में खरवन के तौर पर दिया जाता है।

 कुल देवता को मऊर अर्पण करते हुए बईगिन
Photo(1):-Laxman Singh from Sua, Medininagar,Palamu

बैगा/बईगिन:- चेरो जनजाति में कुल देवी की भी कल्पना है जैसे- डीहवार, गाँव-गमहेल इत्यादि। चेरो समुदाय के द्वारा इन्हे भिन्न- भिन्न त्योहारों पर पशुओं की बली देकर खुश किया जाता है ताकि गाँव की समृद्धि बनी रहे। कुल देवता को खुश करने के लिए चेरो समुदाय में बैगा होता है जो खुद चेरो समुदाय या परहिया जनजाति समुदाय के सदस्य होता है। बैगा शादी-विवाह में मटकोड़वा के दिन भूमि पूजन करता है। शादी के बाद कन्या पक्ष को मिलने वाले लड़के का ‘मऊर’(सेहरा) को भी धरती को अर्पण करता है।

गुरुबाबा:- इसे पुरोहित भी कहते हैं। गुरुबाबा जाति से ब्राह्मण होता है। चेरो समुदाय द्वारा गुरुबाब को तभी बुलाया जाता है जब किसी परिवार को गुरुमुख होना होता है। अन्यथा गुरुबाबा सिर्फ खरवन लेकर चले जाते हैं। गुरु बाबा के द्वारा ग्रह -गोचर भी देखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो गुरुमुख होगा वह बेटा-बेटी दान करने योग्य हो जाता है।

विवाह से पूर्व मंडप मे सामग्री को ठीक करते ठाकुर 
Photo(2):-Laxman Singh from Sua, Medininagar,Palamu
ठाकुर(नाई):- यह ब्राह्मण का सहायक होता है। शादी-विवाह एवं मरणी,कथा-वार्ता वगैरह में ब्राह्मण के द्वारा पढे गए मंत्र के साथ वाला कर्मकांडों को करने में सहयोग करता है। कभी-कभी ब्राह्मण के अनुपस्थिति में ठाकुर ही पूजा-पाठ को करवाता है। गाँव में शादी विवाह में शामिल होने के लिए लोगों को सूचना भी पहुँचाता है। ‘जीतिया’ ‘कर्मा’ जैसे पर्वों में लोगों का पैर रंगने का कार्य भी नाई के द्वारा ही किया जाता है।



डोम (मेहतर):- डोम या मेहतर चेरो के साथ सामाजिक रूप से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है की इनके बिना शव का जलाना शुभ नहीं होता है। अतः डोम शव के जलाने के लिए आग प्रज्वलित करता है। फिर वो जलती हुई लकड़ी को मुखाग्नि देने वालों को प्रदान करता है। बदले में उसे कुछ मुद्रा दी जाती है

पंडित:- चेरो समुदाय में कर्मकांड को बढ़ावा देने का काम पंडित के द्वारा ही किया गया है। पंडित चेरो समाज में होने वाले सभी प्रकार के हिन्दू-कर्मकांड से जुड़े क्रियाओं को करवट है। बदले में इसे भी खरवन के साथ कुछ मुद्रा दिया जाता है।

मटकोड़वा के लिए जाते हुए लोग 
Photo(3):-Laxman Singh from Sua, Medininagar,Palamu
महार/महराईन:- चेरो जनजाति में शुभ कार्यों जैसे शादी-विवाह, पूजा पाठ एव मृत्यु के दौरान ढोल बजाने का रिवाज है। चेरो मे इस कार्य को महार के द्वारा किया जाता है। साथ ही बहुत पहले जब संस्थागत प्रसव गाँव तक नहीं पहुँचा था तब तक महराईन(महार की पत्नी) के द्वारा प्रसव कराई जाती थी। बदले में महार परिवार को खरवन के साथ कुछ मुद्रा दी जाती है।
 



कहार:- जिस वक्त चेरो समुदाय में डोला शादी-विवाह हुआ करता था उस वक्त डोली को टाँगने के लिए कहार को बुलाया जाता था। बदले में उनको मेहनताना दी जाती है । 

कटाह:- यह ब्राह्मण जाति से ही आता है। परंतु कटाह सिर्फ मृत्यु कार्य में ही आते हैं और मृत आत्मा के स्वर्ग के नाम पर बहुत सारे पैसे और सामग्री को कटाह को दी जाती है। चेरो मे ऐसा माना जाता है की सुख के सामग्री दान करने से मृत आत्मा को स्वर्ग प्राप्त होगा। 


नोट:- यह पूर्णतः रिसर्च आधारित लेख है। विशेष जानकारी के लिए आप लेखक से संपर्क कर सकते हैं। हमसे सम्पर्क करें-sksinghsua@gmail.com



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