चेरो जनजाति का बदलता दौर
झारखंड के पलामू प्रमंडल में वास करने वाले चेरो जनजाति का भूतकाल ऐतिहासिक है। एक समय था जब चेरो झारखंड के प्रतापी राजवंशों में गिनती हुआ करते थे जिसका साक्ष्य है -लातेहार में अवस्थित पलामू का किला, मेदिनीनगर के समीप शाहपुर में 'शाहपुर का किला', 'लातेहार के मानकेरी किला', मनातू के 'नवागढ़ का किला' एवं एवं अन्य छोटे-छोटे किलें। चेरो जनजाति बदलते वक्त के साथ अपनी रणनीति भी बदलते रहा जिसके परिणाम स्वरूप ही वह पलामू क्षेत्र में साम्राज्य को कायम करते रहने में सक्षम रहे। अन्य जातियों के अनुरूप इन्होने भी ‘जैसा देश वैसा वेश’ को अपनाया। इसीलिए इतिहास में देखा गया कि जब भी चेरो राजा कमजोर होते नजर आए पीछे हटकर रणनीति बनाई और जैसे ही मौका मिला वैसे ही सेना को संगठित करके पुनः चढ़ाई की और अपनी छीनी हुई राज्य वापस हासिल किया।
अभी वर्तमान समय में चेरो जनजाति के लोगों से बात करने से पता चल जाता है कि इन्हें अपने इतिहास पर गर्व है और वे इस इतिहास को लेकर याद कर जीना चाहते हैं। किन्तु बदलते दौर में चेरो जनजाति थोड़े पीछे रह गए हैं जिसमें देखा जा सकता है की इनकी प्राचीन किला लगभग खंडर में बदलते जा रहे हैं। इनका आजीविका का मात्र साधन बरसाती खेती एवं मजदूरी ही हैं।
चेरो परिवारों
में उच्च-स्तरीय शिक्षा की कमी है। जो परिवार आर्थिक रूप से थोड़े मजबूत हैं वे ही उच्च
शिक्षा को प्राप्त कर पाते हैं, अन्यथा आम लोग ऐकडेमिक पढ़ाई भी पूरा नहीं कर पाते हैं।
चेरो के रहन सहन एवं संस्कृति जनजाति एवं हिन्दुओ का मिश्रण है। चेरो सरहुल भी मानते
हैं और रामनवमी भी किन्तु हिन्दू धर्म से इनको मोह भंग होता दिख रहा है और ये अब आदिवासी/
सरना धर्म को मानने लगे हैं।
चेरो जनजाति के पंचायती व्यवस्था भी है जो पूर्णतः लोकतात्रिक है, इनके पंचायती व्यवस्था को 'भैयारी पंचायती व्यवस्था' कहते है। अन्य जनजाति के भांति इनमें भी, अचल सम्पतियों पर पुरुष पक्ष का अधिकार होता है किन्तु पुरुष के नहीं होने पर महिलायें/बेटियाँ ही जगह जमीन के असली मालिक रहती है।
चेरो एक इंडो-आर्यन भाषा 'सादरी' बोलते हैं जिसमें समय के साथ अंग्रेजी के शब्दों की बहुलता होती है। इससे साफ पता चलती है कि चेरो अंग्रेजों के भाषा को भी समझने का भरपूर प्रयास किया ताकि उनके खिलाफ रणनीति बनाया जा सके।
नोट: चेरो के बारे में विस्तार से टॉपिक के अनुसार इसी ब्लॉग के माध्यम से मिलता रहेगा,,,
अतः आप समय-समय पर ब्लॉग को देखते रहें, बहुत जल्द ही अगला टॉपिक आपको पढ़ने को मिलेगा।
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