शनिवार, 16 दिसंबर 2023

चेरो जनजाति का पंचायती व्यवस्था -'भैयारी (बरियारी) पंचायत'


खंड-२ 

परिचय 

अन्य जनजातियों के भांति चेरो जनजाति में भी स्वशासन व्यवस्था होती है जिसे भैयारी पंचायत कहते हैं । परंतु चेरों की पंचायती व्यवस्था पूर्णतः लोकतांत्रिक व्यवस्था पर आधारित है। इस व्यवस्था को स्थानीय भाषा में 'पंच' भी कहते हैं । इसमें सामाजिक स्तर के जघन्य अपराध (बलात्कार, हत्या ) को छोड़कर सभी प्रकार के सामूहिक निर्णय लिए जाते हैं।  

भैयारी पंचायत कैसे बैठती है ? 

           गाँव का जो भी व्यक्ति पीड़ित है अर्थात उसे किसी ने पड़तालित या फिर हानि पहुँचाया है, वह दोषी व्यक्ति के खिलाफ पहले गाँव में विभिन्न व्यक्ति के पास समस्या रखता है और उनसे राय लेता है कि अमुक विषय में उसे क्या करना चाहिए। जब गाँव के अधिकांश लोग उसे राय देते हैं कि पंच  बुलाने के लिए, तब वह किसी निर्धारित तिथि को बैठक बुलाता है। पंचायती में गाँव के गणमान्य एवं वरिष्ठ व्यक्ति को पंच  बनने के लिए आग्रह किया जाता है। उसके बाद किसी निर्धारित तिथि को पंचायती  बुलाई जाती है। 
पंचायत सुआ, मेदिनीनगर का एक दृश्य 

        उक्त तिथि के जानकारी के लिए कुछ दिन पहले पूरे गाँव में शाम के समय किसी व्यक्ति से कहलवा दिया जाता है जिसे  स्थानीय भाषा में 'हकवा पिटवाना' कहते हैं। आरोपी व्यक्ति को भी बतलाया जाता है और उस दिन उपस्थित होने को बोला जाता है । बदले मे खबर पहुँचाने  वाला व्यक्ति को पैसे या अन्य जरूरी सामान दिया जाता है। 

भैयारी पंचायत में पंच  का गठन कैसे की जाती है ?

  पंचायत मे जुटने वाले लोग पाँच लोगों को चयनित करते हैं, पाँच लोगों में से दो- दो लोग दोनों पक्ष से  एवं एक व्यक्ति पूरे जनता की ओर से  होते हैं। यही पाँच लोग को पंच  कहते हैं। ये पाँच लोग ही निर्णय लेते हैं। एक व्यक्ति जो पूरे जनता के ओर से चयनित होता है उसे दोनों पक्षों के द्वारा पैसा भी दिया जाता है। 
    
भैयारी पंचायत में फैसला कैसे होता है?

   चयनित पंच  लोग दोनों पक्ष को बारी- बारी सुनते हैं । गवाह को भी सुना  जाता है। गवाह एवं दोनों पक्ष के सुनने के बाद पंच  थोड़ा दूर जाकर अकेले के निर्णय लेते हैं और फिर अपना निर्णय देते हैं। 
अगर गुनाह बड़ा है तो उसे उसी अनुसार दंड  दी  जाती है। छोटी गलतियों पर आर्थिक दण्ड, उठक-बैठक या फिर माफी मँगवा लिया जाता है। पंच  का हमेशा प्रयास रहता है कि फैसला के बाद किसी प्रकार का गिले-शिकवे न रह जाए। इसी लिए दोनों पक्ष को गले मिलवाया जाता है। साथ ही कुछ आर्थिक एवं सामाजिक बॉन्ड भी लिखवाया जाता है। दण्ड के तौर पर प्राप्त राशि को समाज के जरूरी में खर्च किया जाता है। 

 भैयारी पंचायत के फैसला से  यदि व्यक्ति संतुष्ट न हो तो क्या किया जाता है?

    यदि व्यक्ति निर्णय से संतुष्ट न हो तो वह पुनः किसी अन्य तिथि को बैठक बुला सकता है। साथ यदि पंच  को लगता है कि निर्णय से दोनों पक्ष में से कोई भी एक पक्ष राजी नहीं है तो उसे आगे (कोर्ट/थाना) बढ़ने के लिए बोल दिया जाता है । लेकिन शर्त होती है कि आगे से उसके किसी भी समस्या में पंच  नहीं बैठेगा। 

भैयारी पंचायत में और क्या निर्णय लिए जाते हैं ? 

    यदि किसी बाहुबली या माफिया, जमींदार या कोई अन्य व्यक्ति या समुदाय चेरो के खिलाफ काम करता है तो उससे लड़ने के लिए विशेष बैठक बुलाया जाता है। अमुक विषय पर योजना बनाया जाता है एवं कार्य को निष्पादन के लिए लोगों में सहमति बनती है । फिर उसपर योजना बद्ध तरीके से धावा बोला जाता है। 


 
Researcher: Surendra Singh Chero
       MBA in Rural Management

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